28 गर्वीले वर्षों का सुंदर सफल हासिल हुआ एक मुकाम विषम परिस्थितियों एवं उतार.चढ़ाव भरी राहों को पार करते हुए और प्रिंट मीडिया के लिए चल रहे चुनौतीपूर्ण समय को  सफलतापूर्वक झेल कर नवबिहार टाइम्स ने अपने 28 वर्ष पूरे कर लिये हैं। यहां यह कहने में काफी संतुष्टि हो ेरही है कि किसी संस्थान के लिए 28 वर्षों का समय कुछ कम नहीं होता। बिहार विभाजन के बाद दक्षिण बिहार से प्रकाशित होने वाला बिहार.झारखंड का एकमात्र  हिंदी दैनिक नवबिहार टाइम्स अपने पाठकोंए विज्ञापनदाताओं और शुभ्च्छुओं का निरंतर  बनाये रखने के लिए अपनी 28 वीं वर्षगांठ पर शुभकामनाएं देते हुए आशा करता है कि आने वले दिनों में इससे भी अधिक प्रगाढ़ संबंध कायम हो।

आज की पत्रकारिता के इस प्रतिस्पर्द्धा और चुनौती भरे माहौल में छोटी एवं अखबार के लिए कम ऊर्जावान जगह से दैनिक समाचार पत्र का निरंतर प्रकाशन इस बात का प्रमाण है कि निश्चित रूप से नवबिहार टाइम्स अपने प्रसार क्षेत्र में जबरदस्त पकड़ बनाये हुए है। इसी का परिणाम है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बढ़ते प्रभाव और बड़े अखबारों के रंगीन और लुभावने पृष्ठ भी नवबिहार टाइम्स के सुधी पाठकों और शुभ्ोच्छुओं के दिलोदिमाग को विचलित नहीं कर पाये। प्रमाणिक और तथ्यपूर्ण स्थानीय खबरों के लिए जाने जाना वाला नवबिहार टाइम्स बड़े अखबारों के अपेक्षा इस क्ष्ोत्र में पाठकों की पहली पसंद है।

पिछले 28 वर्षों के दौरान ऐसा कभी नहीं हुआए जब नवबिहार टाइम्स के समक्ष विश्वसनीयता का संकट उत्पन्न हुआ हो। हर बार हमने जो भी खबर पेश कीए वह निश्चित रूप से तथ्यपूर्ण व प्रमाणिक थी। हमने हमेशा इस बात का ख्याल रखा है कि हम जो भी पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करेंए वह संतुलित व सही हो। वस्तुतरू हमारी कोशिश गागर में सागर भरने जैसी रही है। विवादास्पद एवं भ्रामक समाचारों के लिए नवबिहार टाइम्स में स्थान न होना इसकी सबसे बड़ी खासियत है। बिहार.झारखंड में अपना कारोबार चला रहे व्यवसायी हों या सरकारी उपक्रम अथवा कार्यालयए विज्ञापनों के प्रकाशन के लिए नवबिहार टाइम्स में इन्हीं खुबियों के चलते प्राथमिकता देते हैं।

जब यहां से पीछे मुड़कर देखता हूं तो बड़ा अचंभितए हैरत और इस अविश्वसनीय कल्पना के साकार होने की इस क्षण पर गौरवान्वित होने से ज्यादा हतप्रभ होता हूं। मेरे विस्मय को मेरे पाठक अजूबा मान सकते हैं लेकिन यह संयोग भी किसी 8वें आश्चर्य से मेरे लिए कतई कम नहीं है कि नवबिहार टाइम्स के प्रकाशन के 28 साल पूरे हो गये। मैंने जब इस अखबार को आरंभ किया था सही मायने में यह कहते और स्वीकारते हुए मुझे कोई संकोच नहीं हो रहा है कि उस समय भले ही मैंने नवबिहार टाइम्स की बुनियाद रख दी हो मगर इसको लेकर एकदम आश्वस्त नहीं था कि यह कितनी सांसे ले सकेगा। कुछ जोशए कुछ उत्साह और कुछ औरों से अलग हटकर करने की मंशा से ही मैंने इस अखबार को शुरू किया थाए मगर समय की चाल के साथ उठते.बैठतेए लड़खड़ातेए गिरतेए संभलते नवबिहार टाइम्स को 28 वर्ष का नौजवान देखने की तो कल्पना तक नहीं की थी। मगर जिस तरह किसी माता.पिता को अपने बेटे के 28 साल के होने पर खुशी होती हैए मेरी खुशी भी अंततरू अपने इस नौजवान हो गये नवबिहार टाइम्स को देखकर हो रही है। एक बच्चे की मानिंद ही इस नवबिहार टाइम्स को भी 28 साल साल में हजारों थपेड़ों से रूबरू होना पड़ा है। मगर मेरे लिए चिकित्सक ही मेरे पाठक रहे हैंए जिनकी ऊर्जा उत्साह और लगातार साथ खड़े रहने की अदम्य लालसा की खुराक के कारण ही यह अखबार 28 साल का हो गया है।

मैं आज अपने तमाम पाठकों और औरंगाबाद के नागरिकों को यह जानकारी देते हुए बड़ा उत्साहित महसूस कर रहा हूं कि बगैर किसी पूंजीपति या बड़े घराने की मदद से नवबिहार टाइम्स बिहार का इकलौता दैनिक अखबर हैए जिसने 28 साल तक लगातार प्रकाशन का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।  नवबिहार टाइम्स   दूसरा अखबार है जिसने केवल अपने और पाठकों के बूते 28 साल का सफर पूरा किया है। खासकर बिहार और पूरे झारखंड राज्य में तो नवबिहार टाइम्स के सामने कोई टक्कर ही नहीं है। बिहार के सबसे पिछले जिलों में से एक औरंगाबाद को नवबिहार टाइम्स से जो प्रतिष्ठा मिल रही हैए यह बड़े.बड़े शहरों को नसीब नहीं हो पाया। बात दूर की न कर अपने करीबी बड़े शहरों की करते हैं तो गयाए सासारामए आरा तक से किसी दैनिक अखबार ने इतनी लंबी अवधि तक प्रकाशन की हिम्मत नहीं जुटायी। इन शहरों में पिछले कई वर्षों से कुछेक अखबारों का प्रकाशन आरंभ हुआ भी है मगर वह किसका हैघ् एक बड़े घराने का अखबार है जिसके कई संस्करण कई प्रांतों से पहले ही निकल रहे हैं।

बिहार में तो मीडिया और अखबरों की हालत सामान्य तौर पर बेहतर मानी जाती रही है मगर तमाम बड़े अखबारों की लक्ष्मण रेखा केवल पटना.रांची तक ही रही। भले ही पाठकों का संबल पत्र.पत्रिकाओं को मिला है मगर विज्ञापनदाताओं का उत्साह बिहारी मीडिया को लेकर नहीं होता। आमतौर पर एक गरीब राज्य का तमगा देकर बड़ी.बड़ी कंपनियां भी बिहारी मीडिया के लिए अपनी थ्ौली नहीं ख्ोलती है। इन तमाम हौसले को तोड़ने वाले तथ्यों.आंकड़ों और निराशाजनक माहौल में नवबिहार टाइम्स को जीवित रखने में जो मानसिकए शारीरिक और आर्थिक मदद की है उसकी कहानी बड़ी रोचक और रोमांचक हैए जिस पर फिर भी चर्चा करूंगा। फिलहाल परिवार के तमाम सदस्यों के प्रति आभार प्रकट करने का मैं जोखिम ले रहा हूंए यह जानते हएु भी कि नवबिहार टाइम्स केवल मेरा नहीं बल्कि मेरे पूरे परिवार समेत मेरे शुभचिंतकों का अपना है।

जिस दिन मैंने इस नवबिहार टाइम्स की कल्पना कर प्रकाश की योजना बनायी थी तो वाकई उस दिन मैं एकदम अकेला था। खासकर किसी अखबार निकालने की भनक अपने परिवार तक को नहीं लगने दी मगर आज जब यही अखबार 28 साल का हो गया है तो आज मेरे साथ पाठकोंए सहयोगियों और विज्ञापनदाताओं की लंबी कतार है। मैं 28 साल पहले एकदम अकेला थाए मगर आज मेरे साथ हजरों लोगों का हाथ और साथ है। इससे अब यह सोचना कि इस अखबार का क्या होगाए एक अकेले मेरे बूते से बाहर है क्योंकि अब इस पर सैकड़ों लोगों का मानसिकए शारीरिकए बौद्धिक और आर्थिक कब्जा है।

आज जब नवबिहार टाइम्स के 28 साल पूरे हो गये हैं तो मैं अपने मित्रों.पाठकों से कुछ अर्ज करना चाहता हूं। कुछ भावी योजनाओं पर प्रकाश भी डालना चाहता हूं। योजना और भावी कल्पना किस हद तक पूरे होंगेए यह तो मैं नहीं जानताए मगर आज मौका ही कुछ भावनात्मक और अपनी उपलब्धियों को रखने का है कि आप सबों के सामने कुछ निवेदन करने का साहस कर रहा हूं। जिस तरह परिवार में कोई लड़का या लड़की बड़ी हो जाती है तो पूरा परिवार शादी.सगाई की चिंता करने लगता है। यहां पर मेरा नवबिहार भी अभी एकल है। इसकी शादी.सगाई करने की जरूरत है। यानी नवबिहार का जोड़ा होना जरूरी है। एक अखबार का जोड़ा एक संस्करण को बढ़ाकर 2 करने का या कई करने पर होता है। मैं भी अब आप लोगों से प्रार्थना करूंगा कि नवबिहार टाइम्स का तिलक बिहार की राजधानी पटना के ललाट पर लगे। पटना से भी इसका प्रकाशन आरंभ हो। हालांकि यह कब होगाए किस तरह पूरा होगाए मैं नहीं जानताए मगर इसको पूरा करने के अभियान में एक बार फिर आप तमाम लोगों को मेरे साथ लगना और जुड़ना होगा। पटना का सफर यदि साकार रहा तो संभव है कि रांची पर भी कभी सोचा जाये तथा पटना.रांची का सपना पूरा हो गया तो मैं यह दावा करता हूं कि फिर नवबिहार टाइहम्स को देश की राजधानी दिल्ली से प्रकाशित करने का सपना जरूर पूरा किया जायेगा। आप इस तथ्य पर गौर करें कि मेरी और मेरे साथ आप तमाम लोगों की लड़ाई ही खिलाफत वाली हवा और धारा से है। दिल्ली.मुंबई के बड़े अखबार पटनाए रांचीए लखनऊए जयपुरए भोपाल से भी अखबार निकालते हैंए मगर नवबिहार टाइम्स की यात्रा बारुनए औरंगाबाद से होकर पटनाए रांचीए नई दिल्ली तक करने की है। यह भी एक ऐसा संयेाग हैए जिसका गौरव और अवसर केवल नवबिहार टाइहम्स को ही मिल सकता है। अपनी बात कहने के इस अपेक्षित मौके पर दैनिक अखबरों के अलावा मासिक साहित्यिक पत्रिका और पॉलिटिकल पत्रिका समेत बाल पत्रिका पर भी कुछ योजनाएं हैं। इन पर संभवतरू काम करना मुमकिन हो सके। आप मान और कह भी सकते हैं कि मेरे सपना किसी मुंगेरीलाल के समान भी हो सकते हैंए मगर आज जब नवबिहार टाइम्स 28 साल का हो गया है तो मेरा हक बनता है कि मैं भी कुछ सपना देखूं और कुछ नयाकर गुजरने का संकल्प लूं। मैं जानता हूं कि पराजय तो मेरी पूंजी हैए मगर यदि हौसले से जंग करें तो संभव है कि पूरे आकाश पर भी कब्जा हो जाये। बारून जैसे लघुत्तम नगर से नवबिहार टाइम्स का यह सफर मेरे लिए आज भी गौरव का प्रतीक है मगर टारगेट को थोड़ा लंबा और ऊंचा कर ही अगली यात्रा को शुरू की जायेगी।

मैं एक बार फिर कहना चाहूंगा कि नवबिहार टाइम्स का यह रजत महोत्सव पूरे साल तक मनाया जाता रहेगा। कभी सेमिनारए कभी वाद.विवाद प्रतियोगिताए कभी पेंटिंग प्रतियोगिताए कभी संगीतए कभी ख्ोलए कभी कवि सम्मेलन का अयोजन कराकर नवबिहार की गूंज को बरकरार रखना होगा। मैं अब पहले से ज्यादा जिम्मेदारी महससू कर रहा हूं और यह प्यारे से अपने जिले और इसके तमाम लोगों के प्रति नवबिहार टाहम्स की ओर से है। पत्रकारिता में नवबिहार टाइहम्स की अभी तक कोई सार्थक भूमिका रही है या नहींए यह तो समालोचकों का प्रसंग हैए मगर नवबिहार टाइम्स पत्रकारिता के मानक और पत्रकारों के लिए बड़च बन सकेए यह जरूर मेरी कोशिश होगी।

आज का दिन ही कुछ भावनात्मक है कि दिल में बहुत सारी बातें हैं जो मैं आपके समक्ष रखना चाहूंगाए मगर फिलहाल वाणी और भावना पर रोक लगाते हुए मैं एक बार फिर अपने तमाम शुभचिंतकोंए मित्रोंए विज्ञापनदाताओं के प्रति आभार जताना चाहूंगाए जिनकी मदद के बगैर नवबिहार टाइम्स का यह स्स्वर्णिम सफर कभी सफल हो ही नहीं सकता था।

28 वर्षों से मगही एवं भोजपुरी क्ष्ोत्र में आंचलिक पत्रकारिता को जीवंत बनाये रखते हुए जिस लगन और मेहनत से नवबिहार टाइम्स ने समाज की सेवा की हैए उसी रूप से उसका प्रतिफल पाठकों और शुभ्ोच्छुओं की आर से हमेशा प्राष् होते रहा है। यह संबंध और प्रगाढ़ हो तथा नवबिहार टाइहम्स को चाहने वालों की संख्या में सदैव वृद्धि होए हम यही कामना करते हैं।